गढ़वाल विश्वविद्यालय में सीडीएस जनरल अनिल चौहान का संबोधन

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स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर ऐतिहासिक
श्रीनगर गढ़वाल 21 फरवरी । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान का भव्य स्वागत किया गया। बतौर मुख्य अतिथि जनरल चौहान ने ‘सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर प्रभावशाली एवं ऐतिहासिक संबोधन दिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ। कुलपति ने मंचासीन अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, सैन्य अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की 50 वर्षों की शैक्षिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जनरल चौहान द्वारा विश्वविद्यालय पुस्तकालय को दान की गई शोधपरक पुस्तकों के लिए आभार व्यक्त किया।
अपने संबोधन में जनरल अनिल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल सेना या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से ही विकसित होती है। भारत की सामरिक सोच को वैदिक साहित्य, चाणक्य नीति और धनुर्वेद से प्रेरित बताते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में यह सोच कमजोर भी हुई, लेकिन आज भारत पुनः आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता के बल पर सशक्त हो रहा है।
उन्होंने 1971 के युद्ध, आधुनिक तकनीक आधारित संघर्षों, आंतरिक एवं बाहरी खतरों और परमाणु क्षमता से लैस पड़ोसी देशों के संदर्भ में भारत की रणनीतिक तैयारियों पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ। पल्लवी उनियाल द्वारा सेना में महिलाओं की भूमिका पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में जनरल चौहान ने कहा कि सेना में चयन का आधार केवल योग्यता है, लिंग नहीं। मनीषा सिंह, शुभम, आशीष कुमार सहित अन्य विद्यार्थियों के राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य करियर से जुड़े प्रश्नों के भी उन्होंने विस्तार से उत्तर दिए।
इस अवसर पर जनरल चौहान ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय को 227 सामरिक एवं ऐतिहासिक पुस्तकें भेंट कीं। डॉ. धन सिंह रावत ने श्रीमती अनुपमा चौहान के पुस्तक दान एवं सामाजिक योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में प्रो. एमपीएस बिष्ट की पुस्तक ‘रंगभूमि दर्शन’ का विमोचन भी किया गया। अधिष्ठाता प्रो. ओपी गुसाईं ने आभार व्यक्त किया। देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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