पुलिस का वर्क कल्चर सुधरे, आम आदमी को न सताया जाए
देहरादून 02 फरवरी ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि राज्य में शांति और सुरक्षा से समझौता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
सोमवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन व्यवस्था, कारागार सुधार और जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा। इसे देखते हुए होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सभी तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कैंची धाम बाईपास जून माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।
पुलिस व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि थाने स्तर पर वर्क कल्चर में तत्काल सुधार किया जाए। आम आदमी के साथ मानवीय, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने रात्रि गश्त को और अधिक सघन करने, निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने तथा आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के निर्देश दिए।
भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर मुख्यमंत्री ने कठोर कानून बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि लैंड फ्रॉड में संलिप्त दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। नदी-नालों और सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध निर्माणों के मामलों में संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, लेखपाल और पटवारी की जवाबदेही तय की जाएगी तथा संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए। इसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।
अभियोजन व्यवस्था पर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए, ताकि मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सके।
जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने 1905 हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा कर जीरो पेंडेंसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। योजनाएँ केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। इसके लिए नियमित भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता की निगरानी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अगले छह माह में विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक जनपद के गांवों को 100 प्रतिशत सरकारी योजनाओं से संतृप्त किया जाए। डिजिटल गवर्नेंस को औपचारिकता न मानते हुए पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाए। चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर संबंधित जनपदों में संयुक्त समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँ।
लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि 15 फरवरी तक सड़कों के डामरीकरण का कार्य प्रारंभ किया जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अंत में स्पष्ट कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।









