उत्तराखण्ड में विवाह पंजीकरण में 24 गुना वृद्ध
यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेश की देश के लिए मिसाल
देहरादून 11 जनवरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यूसीसी के लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण को लेकर अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पुराने अधिनियम की तुलना में प्रतिदिन होने वाले विवाह पंजीकरण की औसत संख्या में 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने सत्ता में आने के बाद पूरा किया। मुख्यमंत्री ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया। व्यापक जनमत संग्रह और सभी आवश्यक औपचारिकताओं के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी का यह निर्णय सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम माना जा रहा है। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों को—विशेष रूप से महिलाओं को—समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। यूसीसी के अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप सहित उनसे जुड़े विभिन्न प्रावधानों को शामिल किया गया है। कानून में महिला और पुरुष दोनों के लिए विवाह की समान आयु तय की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक और अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान एवं कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। इसके माध्यम से महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं से भी मुक्ति मिली है।
यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक महज छह माह की अवधि में तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण किए गए। वहीं, वर्ष 2010 में लागू पुराने अधिनियम के अंतर्गत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 064 विवाह पंजीकरण हुए थे। प्रतिदिन के औसत की बात करें तो पुराने अधिनियम के तहत जहां प्रतिदिन लगभग 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई अभूतपूर्व वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है और इसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उत्तराखण्ड ने पूरे देश को एक नई दिशा दी है और मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।







