मुख्यमंत्री ने ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ कार्यशाला का किया शुभारंभ

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आपदा प्रबंधन सामूहिक जिम्मेदारी, सभी विभाग समन्वित रूप से करें कार्य : मुख्यमंत्री
देहरादून 9 जनवरी ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़कला में आयोजित ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास, हवाई यातायात सहायता की एसओपी, आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 तथा आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवा आपदा मित्रों एवं वर्ष 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य में सराहनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया। साथ ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध कराए गए चार वाहनों को भी फ्लैग ऑफ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासन, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को प्रमुख एजेंडा बनाया गया है और उसी के अनुरूप उत्तराखंड सरकार भी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ कर रही है। राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन से आपदा जोखिम को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में हिमस्खलन एक गंभीर प्राकृतिक जोखिम है। संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटन, तीर्थाटन और पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग, प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती और सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को प्रभावी बनाया जा रहा है। शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं। सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है तथा अलाव, रैन बसेरे और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए कहा कि शीतलहर और हिमपात प्रभावित क्षेत्रों में समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए। सीमांत और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों और प्राथमिक उपचार सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ‘युवा आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ जैसी पहलों को और सशक्त बना रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के माध्यम से शीत ऋतु के दौरान संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा होगी और विभागों के बीच समन्वय और मजबूत होगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि शीतलहर धीरे-धीरे असर दिखाती है, लेकिन इसका प्रभाव गंभीर होता है। इसे केवल मौसमी चुनौती नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन को नीति-आधारित और संगठित स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य राजेन्द्र सिंह, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी सहित आपदा प्रबंधन से जुड़े अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।

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