विकास और पर्यावरण के संतुलन से आगे बढ़ेगा उत्तराखंड : धामी

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हल्द्वानी 25 सितंबर ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रखते हुए उत्तराखंड को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विकास की योजनाएं प्रकृति की धारण क्षमता के अनुरूप तैयार की जा रही हैं। महिलाओं, युवाओं और स्थानीय उत्पादों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित ‘जागरण विमर्श-उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों, संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय करीब चार हजार करोड़ रुपये का बजट आज बढ़कर लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्तराखंड तेजी से पर्यटन और फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में होम स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि राज्य की प्रति व्यक्ति आय में करीब 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक 2023-24 में उत्तराखंड और केरल संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सीमित संसाधनों में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पांच लाख रुपये तक के ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था के तहत रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कड़ा नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। अनियमितताओं में शामिल 100 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। युवाओं को सरकारी नौकरियों के साथ ही स्वरोजगार, नए उद्यम और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर भी दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक बच्चे को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के समान अवसर मिलें।

हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज, अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों के आधार पर व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और कुंभ सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं भव्य रूप से आयोजित हो।

मुख्यमंत्री ने अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को उत्तराखंड के सामने बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक होनी चाहिए। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी और सर्वेक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विकास केवल बड़ी परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। विकास के साथ उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता को संरक्षित रखना भी जरूरी है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा और प्रताप बिष्ट, हल्द्वानी-काठगोदाम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, काशीपुर के महापौर दीपक बाली, दैनिक जागरण के संपादक विजय सिंह यादव, कार्यकारी संपादक विष्णु त्रिपाठी, राज्य संपादक मनोज झा, कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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