हर काम देश के नाम’: माउंट त्रिशूल फतह करने निकली सेना के इंजीनियर्स की टीम

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हरिद्वार, 6 सितंबर। भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स के माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान को शनिवार को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 7,120 मीटर (23,360 फीट) ऊंचे माउंट त्रिशूल पर चढ़ाई का यह अभियान गढ़वाल हिमालय की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक को फतह करने का प्रयास है।

अभियान रवाना होने के अवसर पर सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एवं मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल रहे। इस दौरान कोर ऑफ इंजीनियर्स के कई अनुभवी पर्वतारोहियों ने भी अभियान दल से बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया।

गढ़वाल हिमालय में स्थित माउंट त्रिशूल की चढ़ाई अत्यधिक ऊंचाई, दुर्गम रास्तों और तेजी से बदलते मौसम के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। अभियान दल की शारीरिक सहनशक्ति के साथ तकनीकी दक्षता, मानसिक मजबूती और कठिन परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता की भी परीक्षा होगी।

अभियान दल में अनुभवी अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी और अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। टीम ने अभियान के लिए विशेष तैयारी की है, जिसमें ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूल ढलने का प्रशिक्षण, कठोर शारीरिक अभ्यास और पर्वतारोहण की तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण शामिल है। अभियान से जुड़ी तकनीकी और लॉजिस्टिकल चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक योजना तैयार की गई है।

समारोह की शुरुआत अभियान दल के टीम लीडर की प्रस्तुति और ऑपरेशनल ब्रीफिंग से हुई। इसमें प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई के मार्ग, सुरक्षा प्रोटोकॉल और हिमालयी क्षेत्र के दुर्गम रास्तों व बदलते मौसम से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान दल की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान नेतृत्व, सहनशक्ति, अनुशासन, टीमवर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने जैसे गुणों को विकसित करते हैं, जो विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कोर ऑफ इंजीनियर्स के सैपर्स की पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों की गौरवशाली परंपरा का भी उल्लेख किया। समारोह का समापन टीम लीडर को औपचारिक रूप से ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपने के साथ हुआ, जिसके बाद अभियान दल को बेस कैंप की यात्रा और माउंट त्रिशूल पर चढ़ाई के लिए रवाना किया गया।
यह अभियान कोर ऑफ इंजीनियर्स की पर्वतारोहण की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ ही कठिन से कठिन परिस्थितियों में भारतीय सेना के साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, टीमवर्क और उत्कृष्टता की भावना का परिचायक बनेगा।चाहें तो मैं इसे अमर उजाला/दैनिक जागरण शैली में और ज्यादा संक्षिप्त व प्रभावशाली भी बना सकता हूं।

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