
देहरादून, 6 जुलाई। उत्तराखंड में नदियों, जलस्रोतों और पारंपरिक धारा-नौलों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सचिवालय में जलागम सचिव दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) की राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (SLEC) की सातवीं बैठक आयोजित हुई, जिसमें नदी पुनर्जीवन, भू-जल संवर्धन और जल संरक्षण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
बैठक में बागेश्वर की गरुड़ गंगा और पौड़ी की पश्चिमी नयार नदी के विस्तृत परियोजना प्रस्ताव (DPR) प्रस्तुत किए गए। गरुड़ गंगा के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये और पश्चिमी नयार नदी के लिए 48 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को एसएलईसी से अनुमोदन मिलने के बाद अब राष्ट्रीय स्तर की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। दोनों योजनाओं की कुल लागत करीब 60 करोड़ रुपये है।
बैठक में बताया गया कि “एक जनपद–एक नदी” योजना के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक प्रमुख नदी के वैज्ञानिक आधार पर पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। अब तक 13 नदियों के लिए 120 करोड़ रुपये से अधिक की डीपीआर तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें कई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
जल स्रोतों के वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में SARRA के भागीरथ ऐप के माध्यम से प्रदेश के 4,490 जलस्रोतों का GIS आधारित डिजिटल मानचित्रण पूरा कर लिया गया है। साथ ही 5,775 जल संरचनाओं एवं जल स्रोतों का विस्तृत डेटाबेस भी तैयार किया गया है।बैठक में पारंपरिक धारा-नौलों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। अब तक 697 धारा-नौलों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें पहले चरण में ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व वाले 54 धारा-नौलों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की कार्ययोजनाएं तैयार की जा रही हैं।
हरिद्वार जिले में भू-जल स्तर सुधारने के लिए 49 आर्टिफिशियल रिचार्ज शाफ्ट स्थापित करने के लगभग 2.40 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम पुनर्भरण सुनिश्चित करना है।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में SARRA के माध्यम से प्रदेशभर में 86 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। बैठक के अंत में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जनभागीदारी बढ़ाकर जल संरक्षण अभियान को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।बैठक में परियोजना निदेशक जलागम हिमांशु खुराना, एसीईओ SARRA कहकशां नसीम, डिप्टी डायरेक्टर डी.एस. रावत, सीएफओ दीपक भट्ट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जिलों के प्रतिनिधि ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।






