
देहरादून 2 जून। उत्तराखंड में सड़क, रेलवे, बिजली, पेयजल, भवन और अन्य बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन अब जियोस्पेशियल तकनीक के जरिए अधिक सटीक तरीके से होगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान कहा कि पीएम गतिशक्ति पोर्टल और जियोस्पेशियल तकनीक पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
नियोजन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘पीएम गतिशक्ति उपयोग मामलों का संग्रह 2.0’ का विमोचन तथा विभागीय डेटा संग्रहण के लिए मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि जियोस्पेशियल तकनीक के माध्यम से किसी भी परियोजना की लोकेशन, विभागीय समन्वय और मास्टर प्लान तैयार करने में बड़ी सुविधा मिलेगी।उन्होंने निर्देश दिए कि ₹10 करोड़ से अधिक लागत वाली सभी परियोजनाओं में साइट चयन से पहले पीएम गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से जियोस्पेशियल मैपिंग अनिवार्य की जाए। साथ ही सभी नई स्वीकृत योजनाओं को पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए, ताकि योजनाओं की दोहराव (डुप्लीकेसी) रोकी जा सके और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।मुख्य सचिव ने व्यय वित्त समिति की बैठकों में भी पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म के उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग अधिक से अधिक प्रमाणिक डेटा पोर्टल पर अपलोड करें, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता और निर्णय प्रक्रिया बेहतर हो सके।
उन्होंने प्रत्येक विभाग में मास्टर रिसोर्स पर्सन नामित करने, मोबाइल एप को स्टेट प्रगति पोर्टल (उन्नति) से एकीकृत करने तथा अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए। इसके लिए अधिकारियों को BISAG-N के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने पर भी जोर दिया गया।कार्यक्रम में प्रमुख सचिव एल. फैनाई, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं BISAG-N के प्रतिनिधि मौजूद रहे।







