


देहरादून, 13 जून। देश की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रोपदी मर्मू ने शनिवार को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित दीक्षांत सैन्य परेड का निरीक्षण किया। इस अवसर पर अकादमी के 158वें नियमित तथा 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम के प्रशिक्षुओं ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में प्रवेश किया।
दीक्षांत सैन्य परेड में 481 भारतीय प्रशिक्षुओं के साथ 16 मित्र देशों के 34 विदेशी प्रशिक्षु भी सैन्य अधिकारी बने। राष्ट्रपति ने परेड की सलामी लेते हुए नव नियुक्त अधिकारियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सैन्य अधिकारी केवल देश की सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के संरक्षक भी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाते समय कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष की परेड की विशेष उपलब्धि नौ महिला प्रशिक्षुओं का सैन्य अधिकारी के रूप में चयन है। भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक उपलब्धि है, जो महिला सशक्तिकरण तथा महिला नेतृत्व आधारित विकास की दिशा में नए आयाम स्थापित करती है।
उन्होंने 16 मित्र देशों के 34 विदेशी प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण पूर्ण करने को भारत की वैश्विक मित्रता, आपसी विश्वास और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग का सशक्त उदाहरण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि इससे विश्व स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा और रक्षा संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक तकनीकों के दौर में भारतीय सेना को निरंतर नवाचार, आधुनिकीकरण और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने युवा अधिकारियों से अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व करने, उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने तथा सैनिकों के कल्याण और सैन्य दक्षता के बीच संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह , मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नरेन्द्र सिंह सहित सैन्य एवं नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य अतिथि तथा बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने नव नियुक्त सैन्य अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया।
समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि नव नियुक्त अधिकारी राष्ट्र की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे।








