देहरादून, 9 दिसंबर।
भारत में पहली बार सरकार और अकादमिक संस्थान की साझेदारी से ऐसा मॉडल सामने आया है, जो किसानों की बढ़ी हुई आय को सीधे बेहतर मृदा स्वास्थ्य से जोड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग द्वारा अधिकृत आईआईटी रुड़की ने वैज्ञानिक रूप से सत्यापित कार्बन क्रेडिट पर आधारित एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत किसान अपनी टिकाऊ कृषि प्रथाओं से प्रत्यक्ष आय अर्जित कर सकेंगे।
यह कार्यक्रम उन्नत डिजिटल मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन (DMRV) प्रणाली का उपयोग करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन क्रेडिट सुनिश्चित होंगे। न्यूनतम जुताई, कवर क्रॉपिंग, अवशेष प्रबंधन, कृषि-वनीकरण और उन्नत बायो-फर्टिलाइज़र के उपयोग जैसी प्रथाओं से मिट्टी में कार्बन वृद्धि और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी को वैज्ञानिक रूप से मापा जाएगा। इन मापों को सत्यापित कर कार्बन क्रेडिट में बदला जाएगा और इन क्रेडिट की बिक्री से प्राप्त आय सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित होगी। इसी को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम का संदेश तय किया गया है—“सीधी कमाई, स्थानीय फायदा।”
कार्यक्रम की शुरुआत सहारनपुर मंडल से होगी, जहाँ बड़े पैमाने पर कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने की क्षमता मौजूद है। आईआईटी रुड़की किसानों, कार्बन बाजार और वैश्विक खरीदारों के बीच आवश्यक संपर्क स्थापित करेगा, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले, वैज्ञानिक रूप से सत्यापित कार्बन क्रेडिट उद्योग तक पारदर्शी ढंग से पहुँच सकें। यह मॉडल भारत के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य को गति देने के साथ-साथ पुनर्योजी कृषि और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत करेगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि यह पहल किसानों को जलवायु कार्रवाई में सार्थक भूमिका देती है। टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रत्यक्ष और मापनीय आय से जोड़कर यह मॉडल किसानों को सशक्त बनाता है तथा नए आर्थिक अवसर तैयार करता है।
कार्यक्रम के प्रधान अन्वेषक प्रो. ए. एस. मौर्य ने बताया कि वैज्ञानिक ढांचा सुनिश्चित करता है कि मिट्टी में संग्रहित हर टन कार्बन को मापा और सत्यापित कर आर्थिक मूल्य में बदला जा सके। यह केवल कार्बन क्रेडिट का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करने, कृषि लागत घटाने और किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम है।
उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रविंदर ने कहा कि राज्य सरकार इस परिवर्तनकारी कार्यक्रम में आईआईटी रुड़की की भूमिका का स्वागत करती है। यह साझेदारी किसानों को टिकाऊ प्रथाओं का प्रत्यक्ष लाभ देगी और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को भी मजबूत करेगी।
कार्यक्रम के अंतर्गत बड़े पैमाने पर टिकाऊ कृषि प्रथाओं की शुरुआत शीघ्र ही की जाएगी।







