सिडकुल आईटी पार्क की 4,000 करोड़ की भूमि आवंटन फाइल गायब—अभिनव थापर ने उच्च स्तरीय जांच की मांग  की

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देहरादून, 07 दिसंबर 2025।
सिडकुल आईटी पार्क, देहरादून की 98.5 एकड़ सरकारी भूमि—जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग ₹4,000 करोड़ है—उसके आवंटन से जुड़े पूरे रिकॉर्ड के “गायब” होने के मामले ने प्रदेश में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता अभिनव थापर ने इस गंभीर प्रकरण में तत्काल FIR दर्ज करने और स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
 अभिनव थापर कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि सिडकुल प्रशासन ने सूचना उपलब्ध कराने के नाम पर सिर्फ 2 पन्नों की नोटशीट दी है, वह भी वर्ष 2002 तक की। जबकि वर्ष 2002 से 2025 तक की पूरी फाइल—नोटशीट, निर्णय, अनुमोदन, आवंटन प्रक्रिया और दस्तावेज़ मूवमेंट सहित—पूरी तरह गायब है। उन्होंने इसे बड़े स्तर पर रिकॉर्ड दबाने और करोड़ों की सरकारी भूमि से जुड़े दस्तावेज़ों को जानबूझकर मिटाने की कार्रवाई बताया।
गौरतलब है कि मुख्य सूचना आयुक्त ने 16 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि संपूर्ण फाइल की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए, लेकिन आज तक इसका पालन नहीं किया गया। थापर ने इस अवहेलना को सरकारी तंत्र में गहरे भ्रष्टाचार का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि इन्हीं बिंदुओं के आधार पर उन्होंने 03 दिसंबर को मुख्यमंत्री, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव और सिडकुल एम डी को पत्र भेजकर तत्काल एफआईआर , फाइल पुनर्निर्माण और स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।अभिनव थापर ने कहा98.5 एकड़ सरकारी भूमि जनता की अमानत है। फाइलों का गायब होना और आदेशों की अनदेखी स्पष्ट रूप से बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है। दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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