27 दिसम्बर 5 जनवरी 2025 तक चलने शिल्प बाजार में लगभग 21 राज्यों शिल्प कलाकार हस्त निर्मित उत्पादन की प्रदर्शनी लगायेंगे

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देहरादून(अनिल भट्ट)28 दिसम्बर।
देहरादून के सहस्त्रधारा रोड पर गांधी शिल्प बाजार का 27 दिसम्बर 5 जनवरी 2025 तक चलने भारत के करीब 21 राज्यों से शिल्पकार अपने हाथों से बनाए गए उत्पादों को लेकर पहुंचेंगे । इसमें उत्तराखंड की भेड़ के ऊन से बने उत्पाद, पिरूल से बने उत्पाद, लकड़ी से बने उत्पाद, कपड़े से बने उत्पाद और मिट्टी से बने उत्पाद आपको खरीदने के लिए मिल जाएंगे. इसमें कई राज्यों और जिलों की कलाओं की विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा.
भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के उत्तराखंड के प्रभारी अनिल चंदोला ने जानकारी देते हुए कहा है कि हमारी संस्था पिछले 35 सालों से हस्तशिल्प कलाकारों के उत्थान के लिए काम कर रही है. हमारी संस्था का उद्देश्य खाली हाथों को रोजगार देना था । इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं । सरकारी एजेंसी ने भी इस कार्य में सहयोग करती है ।भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने हस्त शिल्पकार और बुनकरों को आगे बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग और डिजाइनिंग वर्कशॉप लगाकर मदद करता है । जिससे उनमें कौशल विकसित होता है या उनका पुश्तैनी काम और निखर कर सामने आता है. ट्रेनिंग करके का काम किया जाता है । लेकिन उन्हें मार्केट और प्लेटफार्म देना भी बड़ी चुनौती है. इसलिए हमारी संस्था इस तरह शिल्लप बाजार लगाती है । देहरादून में 27 दिसंबर से सहस्त्रधारा रोड स्थित आसाराम बापू आश्रम के पास गांधी शिल्प बाजार का आयोजन किया जा रहा है. इस बाजार में हस्तशिल्प कलाकारों को मुफ्त में स्टॉल दिया जा रहा है ताकि उन्हें मार्केट दिया जा सके. वहीं इस आयोजन में अलग-अलग राज्यों की ट्रेडिशनल आर्ट देखने के लिए मिल रही है । उन्होंने कहा कि उनकी संस्था ऋषिकेश में लोगों को हैंडीक्राफ्ट बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है. हम उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली भेड़ की ऊन से बने उत्पाद, भीमल,कंडाली, पिरूल और भांग के रेशे से बने उत्पादों पर काम किया जाता है ।ताकि यहां के नैचुरल फाइबर के उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सके । नैचुरल फाइबर के बने उत्पाद, लकड़ी के उत्पाद और मिट्टी के उत्पाद समेत आप यहां कई तरह के उत्पाद यहां खरीद सकते हैं ।

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