कदली वृक्ष लेकर मायके पहुंचीं मां नंदा-सुनंदा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नंदा-सुनंदा महोत्सव का शुभारंभ, पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने ढोल-दमाऊ और मसकबीन की धुन पर किया नृत्य

देहरादून, 15 सितंबर। कूर्मांचल परिषद गढ़ी कैंट शाखा की ओर से मंगलवार को नंदा-सुनंदा महोत्सव-2026 का शुभारंभ धूमधाम से किया गया। ब्लूमिंग बड्स, टपकेश्वर चौक गढ़ी कैंट से श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा और पीले वस्त्रों में कदली वृक्ष लेकर ढोल-दमाऊ और मसकबीन की धुन पर झूमते हुए सीताराम मंदिर, नींबूवाला-कौलागढ़ पहुंचे। यहां विधि-विधान के साथ मां नंदा-सुनंदा को बेटी के रूप में मायके लाया गया।

महोत्सव के तहत मां नंदा-सुनंदा अगले नौ दिनों तक सीताराम मंदिर नींबूवाला-कौलागढ़ में विराजमान रहेंगी। वरिष्ठ समाजसेवी राजेंद्र सिंह बिष्ट और उनकी पत्नी नंदी देवी को मां नंदा-सुनंदा के माता-पिता के स्वरूप में राजा-रानी के रूप में स्थापित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कैंट विधायक सविता कपूर ने किया।

मीडिया प्रभारी वंदना बिष्ट ने बताया कि नंदा-सुनंदा की लोकपरंपरा में कदली वृक्ष यानी केले के पौधे का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। कदली के तने से मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। इसे पवित्रता, उर्वरता, समृद्धि और प्रकृति की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में केले के पौधे का उपयोग पूजा और मांगलिक कार्यों में भी किया जाता है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की लोकपरंपरा में मां नंदा को बेटी के रूप में देखा जाता है। कदली वृक्ष से प्रतिमा निर्माण से लेकर विसर्जन तक की पूरी प्रक्रिया में बेटी के मायके आने, सत्कार और विदाई का भाव जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि महिषासुर रूपी राक्षस से बचने के लिए मां नंदा-सुनंदा कदली वृक्षों में जाकर छिपी थीं। इसी मान्यता के कारण मां के दिव्य स्वरूप का निर्माण कदली वृक्ष से किया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह परंपरा मानव और प्रकृति के अटूट संबंध तथा मां नंदा के प्रति उत्तराखंडवासियों की गहरी आस्था को दर्शाती है। महोत्सव के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में कूर्मांचल परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार, गढ़ी कैंट शाखा अध्यक्ष राजेश पंत, शाखा सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक बबीता साह लोहानी, प्रेमा तिवारी, गणेश कांडपाल, धर्मपुर शाखा के सांस्कृतिक सचिव सुंदर आगरी, वंदना बिष्ट, पवन डबराल, हरीश चंद्र पांडे, रमा कांडपाल, कमला उप्रेती, पुष्पा, सविता, गीता तिवारी, पुष्पा मेहरा, कल्पना वर्मा, रेनू बिष्ट, वरिष्ठ समाजसेवी जोगेंद्र पुंडीर, तारा, तनुजा तिवारी, अन्नू, कौलागढ़ पार्षद देवकी नौटियाल, लीला बिष्ट, दुर्गा सिंह कन्याल, कमला पांडेय, गिरीश चंद्र जोशी, सीमा जोशी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

Leave a Comment

और पढ़ें