सैन्यधाम निर्माण में देरी और बढ़ती लागत पर कांग्रेस के सवाल

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देहरादून 6 सितंबर। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी और परियोजना की बढ़ती लागत को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के कथित ‘चुनावी लाभ’ संबंधी बयान को लेकर उनसे इस्तीफे की मांग की है।

प्रेस वार्ता में कर्नल नेगी ने कहा कि सैन्यधाम केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति और सम्मान से जुड़ा स्मारक है। इसलिए इसके निर्माण में पारदर्शिता, समयबद्धता और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 4 नवंबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में सैन्यधाम बनाए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद 23 जनवरी 2021 को पुरकुल गांव में और 15 दिसंबर 2021 को गुनियालगांव में सैन्यधाम का शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत करीब 63 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे लगभग दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

कर्नल नेगी ने दावा किया कि अलग-अलग समय पर सामने आई आरटीआई आधारित जानकारियों में परियोजना की लागत में बदलाव दिखाई दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में लागत करीब 48 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि वर्ष 2024 में कुछ आरटीआई आधारित रिपोर्टों में इसके करीब 99 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।

उन्होंने सरकार से मूल और संशोधित डीपीआर, वित्तीय स्वीकृतियों, टेंडर दस्तावेजों, वर्क ऑर्डर, अतिरिक्त कार्यों की मंजूरी, भुगतान विवरण और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि परियोजना निर्धारित समय सीमा में पूरी क्यों नहीं हुई और देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है।

‘शहीदों के सम्मान को चुनावी लाभ से नहीं जोड़ना चाहिए’

कर्नल नेगी ने मंत्री गणेश जोशी के उस कथित सार्वजनिक बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें सैन्यधाम से ‘चुनावी लाभ’ लेने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि सैन्यधाम किसी राजनीतिक दल की चुनावी उपलब्धि नहीं, बल्कि सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान से जुड़ा स्मारक है।

उन्होंने कहा कि यदि सैन्यधाम के निर्माण को राजनीतिक या चुनावी लाभ से जोड़ा जा रहा है तो यह गंभीर विषय है। इसी आधार पर उन्होंने सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी से इस्तीफे की मांग की।

कर्नल नेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी परियोजना की स्थिति और इसके लोकार्पण को लेकर स्पष्टता की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में कई बार प्रधानमंत्री के हाथों सैन्यधाम के लोकार्पण की चर्चा सामने आई, लेकिन अब तक इसका लोकार्पण नहीं हो सका।

1,734 शहीद परिवारों की मिट्टी पर राजनीति का आरोप

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सैनिक विभाग की उपाध्यक्ष सुजाता पॉल ने कहा कि शहीद सम्मान यात्रा के माध्यम से 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी सैन्यधाम के लिए लाई गई थी और इसे किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि सैनिक की निष्ठा किसी राजनीतिक दल के प्रति नहीं, बल्कि भारत और देश की रक्षा के प्रति होती है। शहीदों की स्मृति और उनके बलिदान को चुनावी लाभ से जोड़ना सैनिकों और उनके परिवारों की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है।

सुजाता पॉल ने सवाल उठाया कि सैन्यधाम शहीदों के सम्मान का स्थल है या इसे राजनीतिक लाभ के मंच के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहीद की शहादत पूरे देश की है और उसका सम्मान भी पूरे देश का होना चाहिए।

कर्नल रामरतन नेगी ने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस का पूर्व सैनिक विभाग शहीदों के सम्मान, सैन्य परिवारों के अधिकारों और सैन्यधाम परियोजना में पारदर्शिता के मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा।
प्रेस वार्ता में कर्नल मोहन सिंह रावत, कैप्टन बचन सिंह, कैप्टन कुशल राणा, लेफ्टिनेंट साहदेव शर्मा, हवलदार बलबीर सिंह, सूबेदार सिरजीत कृशाली, हवलदार हरेंद्र सिंह बिष्ट, सुजाता पॉल और युवा इंटक अध्यक्ष पंकज सिंह क्षेत्री सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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