
देहरादून 04 सितंबर ।गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी पुरानी टिहरी में वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला की गौरवशाली परंपरा को देहरादून में आगे बढ़ाते हुए रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में भव्य रामलीला महोत्सव-2026 का शुभारंभ हो गया। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विधि-विधान के साथ हनुमान ध्वजा स्थापना की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ गढ़वाल के पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ की मंगल ध्वनि के बीच हुआ। हनुमान ध्वज की परिक्रमा, पूजा-अर्चना और हवन के बाद विधिवत ध्वजा स्थापित की गई। इसके साथ ही रामलीला की रिहर्सल शुरू करने की पुरानी परंपरा को भी आगे बढ़ाया गया।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित हो रही रामलीला उत्तराखंड की प्राचीन और अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इस गौरवशाली परंपरा को देहरादून में वर्ष 2023 से निरंतर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर हनुमान ध्वजा स्थापना के साथ रामलीला की रिहर्सल शुरू करने की परंपरा का हर वर्ष श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पालन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 2025 में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इसके साथ ही यह रामलीला उत्तराखंड की सबसे अधिक देखी जाने वाली रामलीलाओं में अपनी विशेष पहचान बनाने में सफल रही।
इस वर्ष पुरानी टिहरी की रामलीला की पारंपरिक चौपाइयों, कथा, संवाद और मंचन शैली को मूल स्वरूप में आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। महोत्सव में भव्य कलश यात्रा, डिजिटल लाइव टेलीकास्ट, लेजर एवं साउंड शो, भव्य मेला तथा बच्चों के लिए झूले और चरखी सहित कई आकर्षण होंगे। विजयादशमी के अवसर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन भी किया जाएगा।
अभिनव थापर ने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल रामलीला का आयोजन करना नहीं, बल्कि पुरानी टिहरी की 1952 से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ते हुए उत्तराखंड की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर के रूप में व्यापक स्तर पर स्थापित करना है।
कार्यक्रम में समिति के सचिव अमित पंत सहित गिरीश पैन्यूली, नरेश कुमार, गिरीश पांडे, दुर्गा भट्ट, नीता बहुगुणा, अजय पैन्यूली, नितिन डंगवाल, आशीष भूटानी और रामेन्द्र सिंह समेत समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।अगर चाहें तो इसे और ज्यादा अखबारी शैली में छोटा और दमदार भी बनाया जा सकता है।








