टीएचडीसी टनल रेस्क्यू अभियान पूरा

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चमोली, 18 अगस्त। हाट-सियासैण, मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को हुए हादसे के बाद करीब 117 घंटे तक चला खोज एवं बचाव अभियान मंगलवार को पूरा हो गया। रेस्क्यू टीमों ने टनल में फंसे और लापता सभी प्रभावित श्रमिकों को बाहर निकाल लिया। हादसे में 12 श्रमिकों को सकुशल रेस्क्यू किया गया, जबकि 10 श्रमिकों की मौत हुई।

13 अगस्त की शाम टनल में पानी का रिसाव और भूस्खलन होने के बाद करीब 22 श्रमिकों के फंसे होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, टीएचडीसी समेत विभिन्न एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
अभियान के दौरान टनल में जमा पानी की निकासी, मलबा हटाने और फंसी मशीनरी को बाहर निकालने के साथ संभावित स्थानों पर लगातार सर्चिंग की गई। पानी निकालने के लिए सक्शन पंप समेत आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने दिन-रात अभियान जारी रखा।
अभियान के अंतिम चरण में 18 अगस्त को दो और श्रमिकों के शव बाहर निकाले गए। इसके साथ ही टनल में फंसे एवं लापता सभी प्रभावित श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया और रेस्क्यू अभियान पूर्ण घोषित किया गया।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने पूरे अभियान की लगातार निगरानी की और मौके पर मौजूद अधिकारियों एवं रेस्क्यू एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया। बाहर निकाले गए घायल श्रमिकों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई ग
रेस्क्यू किए गए श्रमिकों में सुनील दीवान, हारबिल गुड़िया, कमड़ा, निस्तर भिंगरा, विनोद रावना, दीना बेगरा, खेला राम बिसरा, सुबेग सिंह, तिलकराज, पेन सिंह, रोहित पाण्डे और गोविन्दो मंडाल शामिल हैं। ये श्रमिक छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं।
हादसे में प्रदीप पंवार (टिहरी गढ़वाल), जितेन्द्र कुमार और दुर्लभ शर्मा (उत्तर प्रदेश), मुकेश सिंह (चमोली), विजय हंसदा (उत्तर प्रदेश), लोकेश्वर और भुनेश्वर (छत्तीसगढ़), देवनाथ (छत्तीसगढ़), लुकास टोपनो (झारखंड) और चेतन पोयाम (छत्तीसगढ़) की मृत्यु हुई।
रेस्क्यू अभियान में आईटीबीपी जोशीमठ और गौचर, सेना जोशीमठ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और टीएचडीसी की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ कठिन परिस्थितियों में लगातार सर्च एवं रेस्क्यू अभियान चलाया और सभी प्रभावित श्रमिकों को टनल से बाहर निकालने में योगदान दिया।

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