
देहरादून, 29 मई ।राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर में असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास) के पद पर तैनात डॉ. उमेश त्यागी को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करना भारी पड़ गया। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इस संबंध में विभाग द्वारा भेजे गए बर्खास्तगी प्रस्ताव को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अनुमोदित कर दिया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार डॉ. उमेश त्यागी की नियुक्ति कला संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर हुई थी। नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए उनके शैक्षणिक अभिलेखों की सत्यता को लेकर विभाग को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई गई।
जांच के दौरान डॉ. त्यागी द्वारा प्रस्तुत बीए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की अंकतालिकाओं में गंभीर विसंगतियां पाई गईं। विभाग ने संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से कराया, लेकिन विश्वविद्यालय के गोपनीय अभिलेखों से उनका मिलान नहीं हुआ। प्रस्तुत अंक प्रमाण पत्र और अभिलेख विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।
अधिकारियों ने बताया कि विभागीय जांच के दौरान डॉ. त्यागी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया, लेकिन वह अपने प्रमाण पत्रों के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने उपस्थित नहीं हुए।
विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत उनकी सेवा समाप्ति का प्रस्ताव उच्च शिक्षा मंत्री को भेजा गया, जिसे उन्होंने स्वीकृति प्रदान कर दी। मंत्री की मंजूरी के बाद संबंधित शिक्षक की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जी दस्तावेजों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गरिमा और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का छल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करना गंभीर अपराध है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।






