
देहरादून 02 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विभिन्न जनपदों में विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से कुल ₹53.56 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति देहरादून में नगरीय अवस्थापना सुविधाओं के विकास, विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण, विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाने, चमोली जिले में प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त संपत्तियों के पुनर्निर्माण, डिजिटल फोरेंसिक लैबोरेटरी की स्थापना तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और स्मृति द्वार निर्माण जैसे कार्यों के लिए दी गई है।
मुख्यमंत्री ने राज्य योजना के अंतर्गत देहरादून के सिटी मोबिलिटी प्लान से जुड़े छह कार्यों के लिए ₹33.45 करोड़ की योजना स्वीकृत करने के प्रस्ताव को भी अनुमोदन प्रदान किया है। इसके अलावा राज्य कर विभाग, उत्तराखंड में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर (गुजरात) के माध्यम से डिजिटल फोरेंसिक लैबोरेटरी की स्थापना के लिए दोनों पक्षों के बीच हुए पांच वर्षीय अनुबंध के अनुसार ₹11.27 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किए जाने का शासनादेश जारी किया गया है।
मानसून अवधि 2025-26 में 5 अगस्त 2025 के बाद चमोली जिले की सभी तहसीलों में प्राकृतिक आपदा से पूरी तरह क्षतिग्रस्त 85 आवासीय भवनों तथा 17 मृत व्यक्तियों के आश्रितों को राहत प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से अतिरिक्त अवशेष धनराशि के रूप में ₹2 करोड़ स्वीकृत करने को भी मुख्यमंत्री ने अनुमोदन दिया है।
इसके अतिरिक्त हरिद्वार जनपद के झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सालियर में हाईवे के समीप एक त्रिकोणीय आइलैंड पर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए ₹37.12 लाख स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने चम्पावत विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जिले के 74 छूटे तोकों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ₹5 करोड़ तथा ग्राम पंचायत हौली पिपलाटी से ज्योसुड़ा तोक तक सीसी रोड निर्माण के लिए ₹60.20 लाख स्वीकृत करने का भी अनुमोदन प्रदान किया है।
वहीं अल्मोड़ा जनपद के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में न्याय पंचायत कुंवाली के ग्रामों में 200 बिजली के पोल लगाने के लिए ₹46.01 लाख तथा सल्ट विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक स्व. सुरेन्द्र सिंह जीना की स्मृति में स्मृति द्वार निर्माण के लिए ₹41.07 लाख स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत दर्ज मामले में आरोपित लोक सेवकों के विरुद्ध कार्रवाई के क्रम में किशन चंद (सेवानिवृत्त उप वन संरक्षक/प्रभागीय वनाधिकारी) के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति भी प्रदान की है। भारतीय वन सेवा अधिकारी होने के कारण उनके विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1) (बीएनएसएस की धारा 218) के तहत अभियोजन की अनुमति दी गई है।








