भारत पुनः सांस्कृतिक गौरव की ओर अग्रसर

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देहरादून, 29 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड प्रांत प्रचार प्रमुख संजय ने कहा कि भारत पुनः अपने गौरव की ओर लौट रहा है और भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व की जीवन दृष्टि तथा सनातन परंपराएं विश्व स्तर पर पुनः स्थापित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत के मन से गुलामी के अवशेष समाप्त हो रहे हैं और आज विश्व भारत की ओर आशा व मार्गदर्शन की दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वह दिन दूर नहीं जब भारत पुनः विश्वगुरु के आसन पर विराजमान होगा और राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त करेगा।

रविवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित उत्तर महानगर के स्वयंसेवकों के बौद्धिक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में भारत की सांस्कृतिक विरासत और जीवन दृष्टि मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकती है। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सामाजिक संरचना वैश्विक शांति और संतुलन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास और सशक्तिकरण के लिए समाज का अपने मूल्यों और परंपराओं से जुड़े रहना आवश्यक है।

उन्होंने भारतीय पंचांग की कालगणना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विश्व की प्राचीनतम और अत्यंत वैज्ञानिक कालगणना पद्धति है। भारत को समझने के लिए केवल बाहरी मान्यताओं से नहीं, बल्कि उनके पीछे निहित वैज्ञानिक तथ्यों और दर्शन को समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत हजारों-लाखों वर्षों की कालगणना करने वाला राष्ट्र है और यही उसका गौरव है। वर्तमान में विक्रम संवत 2083 में प्रवेश हो रहा है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है। भारतीय युगाब्द के अनुसार वर्तमान काल 5128 वर्ष से अधिक तथा सृष्टि कालगणना के अनुसार लगभग 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख वर्ष से अधिक माना गया है।

नववर्ष के प्रमुख विषयों में संत शिरोमणि संत रैदास जी की 650वीं जयंती, वंदे मातरम् की 150वीं जयंती, राम मंदिर आंदोलन के 550 वर्षों के इतिहास और गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस जैसे विषय शामिल किए गए हैं। इनका उद्देश्य महापुरुषों का स्मरण कर उनके मार्ग को अपनाना और विश्व में शांति की स्थापना करना है।

उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान करते हुए कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा में समाज धीरे-धीरे छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर संगठित हो रहा है। संघ की कल्पना भी यही है कि हिंदुत्व का संगठन शक्तिशाली हो और स्वयंसेवक अनुशासित राष्ट्रभक्ति के साथ एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें। समरसता, सेवा और राष्ट्रभक्ति हिंदू समाज संगठन का आधार हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पानी बचाने, पेड़ लगाने और प्लास्टिक हटाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री 108 महंत कृष्णा गिरी महाराज ने संघ के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विशेष रूप से साधनहीन क्षेत्रों में सेवा का संकल्प स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और जब देश सुरक्षित रहेगा, तभी सभी नागरिक सुरक्षित रहेंगे।

कार्यक्रम के बाद हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन किया। हल्की बूंदाबांदी के बीच अनुशासित कदमों के साथ निकले इस संचलन का विभिन्न स्थानों पर फूलों की वर्षा और भारत माता के जयकारों के साथ स्वागत किया गया। पथ संचलन परेड मैदान से प्रारंभ होकर सर्वे चौक, ईसी रोड, नैनी, भेल चौक, घंटाघर और बुद्धा चौक होते हुए पुनः परेड मैदान में संपन्न हुआ। मार्ग में सिख, गोर्खाली और जौनसारी समाज के प्रतिनिधियों के साथ महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने भी स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

इस अवसर पर महानगर संघ चालक चंद्रगुप्त विक्रम, सह संघ चालक राजेंद्र रमोला, प्रांत अधिकारी अनिल, आशीष ओबेरॉय, सुरेंद्र, ललित बड़ाकोटी, जोत सिंह, सह विभाग प्रचारक सौरभ, विभाग कार्यवाह रविंद्र, अरुण, गजेन्द्र खंडूड़ी, महानगर प्रचारक भारत, उत्तर महानगर कार्यवाह भानु चमोली सहित अनेक पदाधिकारी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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