ऋषिकेश में 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, योग को बताया विश्व शांति का मार्ग

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ऋषिकेश 13 मार्च ।

पुष्कर सिंह धामी ने योग नगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में प्रतिभाग करते हुए योग को विश्व शांति, आत्मिक संतुलन और मानवता को जोड़ने वाला सार्वभौमिक विज्ञान बताया।

मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए योग साधकों, योगाचार्यों और अतिथियों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत करते हुए कहा कि माँ गंगा की आरती में सहभागी बनना और विश्वकल्याण के लिए आयोजित यज्ञ में आहुति देना उनके लिए सौभाग्य का विषय है।उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन और महान परंपरा है, जिसे आज दुनिया भर के करोड़ों लोग अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की विधा है, जो व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में जब पूरी दुनिया तनाव, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही है, तब योग एक प्राकृतिक उपचार प्रणाली के रूप में लोगों को मानसिक और शारीरिक संतुलन प्रदान कर रहा है। योगासन और प्राणायाम से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा एकाग्रता में भी सुधार होता है।उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 21 जून को इंटरनेशनल डे ऑफ योगा के रूप में वैश्विक मान्यता मिली और आज 180 से अधिक देशों में योग का व्यापक अभ्यास किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने देश की पहली “योग नीति 2025” लागू की है। इसके तहत योग एवं ध्यान केंद्र स्थापित करने के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी और शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही राज्य में पाँच नए योग हब विकसित किए जा रहे हैं और सभी आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में योग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने बताया कि प्रदेश में आयुष और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन स्थापित किए जाएंगे, जिससे योग, आध्यात्म, वेलनेस पर्यटन और औषधीय पौधों के क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि परमार्थ निकेतन पिछले लगभग 80 वर्षों से भारतीय संस्कृति, योग और अध्यात्म के माध्यम से दुनिया को जोड़ने का कार्य कर रहा है।इस अवसर पर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती साध्वी भगवती सरस्वती प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर सहित विभिन्न देशों से आए योगाचार्य, प्रशिक्षक और पर्यटक मौजूद रहे।महोत्सव में हठ योग, राज योग, कर्म योग और भक्ति योग के साथ-साथ ध्यान, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े अनेक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव योग और अध्यात्म के माध्यम से मानवता को शांति और सद्भाव के मार्ग पर प्रेरित करेगा।

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