नई दिल्ली 5 मार्च। कई बार बैंक से जुड़ा कोई काम महीनों तक अटका रहता है। खाते में गलती, अनावश्यक चार्ज की कटौती, लोन या क्रेडिट कार्ड से संबंधित समस्या, पेंशन, सब्सिडी या केवाईसी अपडेट जैसे मामलों में ग्राहकों को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन फिर भी समाधान नहीं मिल पाता। कई बार मौखिक शिकायतों पर बैंक कर्मचारी ध्यान नहीं देते और मामला टाल दिया जाता है, जिससे ग्राहक खुद को असहाय महसूस करने लगता है।
हालांकि बैंकिंग नियमों के तहत हर ग्राहक को शिकायत दर्ज कराने और समाधान पाने का पूरा अधिकार है। यदि बैंक आपकी समस्या नहीं सुन रहा है तो आप तीन स्तरों पर शिकायत कर सकते हैं।
पहला स्तर – बैंक की आंतरिक शिकायत व्यवस्था
हर बैंक में शिकायत निवारण (ग्रिवांस) सेल होती है। ग्राहक अपनी समस्या को लिखित रूप में शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर) को दें और शिकायत की रसीद या शिकायत संख्या जरूर प्राप्त करें। यदि 30 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो अगला कदम उठाया जा सकता है।
दूसरा स्तर – नोडल या अपील अधिकारी
यदि शाखा स्तर पर समाधान नहीं मिलता है, तो बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध नोडल या अपील अधिकारी को डाक या ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी जा सकती है। शिकायत के साथ पहले दर्ज की गई शिकायत की संख्या और संबंधित दस्तावेज भी संलग्न करना जरूरी है।
तीसरा स्तर – बैंकिंग लोकपाल में शिकायत
यदि 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं मिलता या बैंक का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो ग्राहक भारतीय रिजर्व बैंक की बैंकिंग लोकपाल प्रणाली में शिकायत दर्ज कर सकता है। यह शिकायत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क की जा सकती है। इसके अलावा 14448 हेल्पलाइन पर कॉल कर भी शिकायत प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है। लोकपाल में शिकायत दर्ज होने के बाद समस्या का समाधान करना बैंक की जिम्मेदारी बन जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार लोकपाल के पास जाने से पहले बैंक में शिकायत दर्ज करना और 30 दिन तक इंतजार करना जरूरी होता है। साथ ही ग्राहक को सभी पत्राचार, ई-मेल, रसीद और दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रस्तुत किया जा सके। इससे ग्राहक के अधिकार सुरक्षित रहते हैं।






