
देहरादून 02 फरवरी।
भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना—2000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना—में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। एनएचपीसी लिमिटेड विद्युत मंत्रालय भारत सरकार के अधीन ‘नवरत्न’ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम ने परियोजना की दूसरी यूनिट 250 मेगावाट, यूनिट संख्या–3 के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा कर दी है।
एनएचपीसी ने 31 जनवरी और 1 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि के दौरान दो बड़ी सफलताएँ हासिल कीं। पहली उपलब्धि के तहत 31 जनवरी 2026 को रात 9 बजे परियोजना की एक यूनिट को राष्ट्रीय ग्रिड के साथ सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज किया गया। इसके बाद 1 फरवरी 2026 को रात 12 बजे 250 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट संख्या–3 का वाणिज्यिक संचालन आरंभ किया गया, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड को अतिरिक्त 250 मेगावाट स्वच्छ जलविद्युत ऊर्जा प्राप्त हुई।
इसके साथ ही सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना से अब तक कुल 2000 मेगावाट क्षमता में से 500 मेगावाट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड को उपलब्ध हो चुकी है। यह उपलब्धि ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने, उच्च मांग के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा देश के नवीकरणीय ऊर्जा मिश्रण में जलविद्युत की भूमिका को और सशक्त करने में सहायक होगी।
एनएचपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने इस अवसर पर विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश और असम राज्य सरकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने परियोजना टीम के समर्पित प्रयासों की सराहना की, जिसका नेतृत्व कार्यपालक निदेशक श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया। साथ ही एनएचपीसी मुख्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के योगदान की भी प्रशंसा की। गुप्ता ने कहा कि इन यूनिटों की सफल कमीशनिंग एनएचपीसी की तकनीकी दक्षता, परियोजना निष्पादन क्षमता और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में इसकी अहम भूमिका को दर्शाती है। यह उपलब्धि भारत सरकार के सतत और आत्मनिर्भर विद्युत क्षेत्र के दृष्टिकोण के अनुरूप है तथा शेष यूनिटों के समयबद्ध कमीशनिंग में भी मददगार साबित होगी।
एनएचपीसी के निदेशक परियोजनाएं संजय कुमार सिंह ने इस सफलता में योगदान देने वाली परियोजना साइट और निगम मुख्यालय की पूरी टीम को बधाई दी। वहीं, परियोजना के कार्यपालक निदेशक राजेंद्र प्रसाद ने एनएचपीसी प्रबंधन, कॉर्पोरेट टीमों, कार्यान्वयन एजेंसियों—मेसर्स जीई वर्नोवा, बीजीएस-एसजीएस-सोमा, टीआरईएल, पीईएल—और स्थानीय हितधारकों व समुदायों के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह उपलब्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है।
Author: Day Night Khabar
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