देहरादून, 05 दिसंबर ।
धराली आपदा के चार महीने बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून स्थित राजीव भवन में प्रेस वार्ता कर दावा किया कि सरकार के सभी दावे जमीनी सच्चाई से बिल्कुल उलट हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व अध्यक्ष व सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल धराली का दौरा कर लौटा, जिसके बाद उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर मीडिया के सामने रखी।
कांग्रेस ने सरकार पर मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर भारी विरोधाभास फैलाने का आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार—आपदा प्रबंधन विभाग 67 मृत/लापता बता रहा है, दायित्वधारी मंत्री कर्नल अजय कोठियाल 147 लोगों के मलबे में दबे होने की बात कहते हैं, जबकि सरकार की ताज़ा रिपोर्ट में 52 मृत/लापता बताए गए हैं। कांग्रेस ने कहा कि इस विरोधाभास ने सरकार की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि धराली में पुनर्वास, पुनर्निर्माण, विस्थापन और राहत कार्यों का कोई नामोनिशान नहीं है। 250 नाली जमीन पूरी तरह तबाह हो चुकी है। 112 आवासीय मकान और लगभग 70 होटल–रिसॉर्ट–होमस्टे बुरी तरह प्रभावित हैं। कई परिवार अब भी बिना मुआवजे के जी रहे हैं। कई भवन ऊपर से सुरक्षित दिखते हैं लेकिन उनकी निचली मंज़िलें मलबे में दबी हैं, और स्थानीय लोग अपने खर्च पर मलबा हटाने को मजबूर हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि कई शव अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है, लेकिन खोज–बचाव के प्रयास बंद पड़े हैं।
कांग्रेस ने दावा किया कि आपदा के मानसिक दबाव में एक महिला ने आत्महत्या कर ली। पूरा बाजार नष्ट हो चुका है और सेब, राजमा, आलू जैसे स्थानीय उत्पादों का विपणन ठप है। कांग्रेस ने कहा कि 112 प्रभावितों में से 38 लोगों को यह कहकर मुआवजा नहीं दिया गया कि उनके मकान “पूरी तरह नष्ट” नहीं हुए, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। सीमांत और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह इलाका पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है।
कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की टीम वास्तविक हालात सामने न ला सके, इसलिए धराली में जैमर लगाकर नेटवर्क बाधित किया गया। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर नदारद पाए गए। मुखबा गांव के लोगों ने गुस्से में पूरे पंचायत चुनाव का बहिष्कार किया—यह वही स्थान है जहां प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले “घाम तापों” योजना की घोषणा की थी।
कांग्रेस ने पूछा कि जब 2013 की केदारनाथ आपदा में कांग्रेस सरकार ने “स्व–निर्धारण मॉडल” लागू किया था, जिसमें प्रभावित स्वयं अपने नुकसान का आकलन प्रस्तुत कर राहत पा सकते थे, तो धराली में यह मॉडल क्यों लागू नहीं किया जा रहा? पार्टी ने कहा कि सरकार नियमों का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि धराली के पूर्ण पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए, न्यूनतम मुआवजा 50 लाख रुपये किया जाए, लापता लोगों की विशेष खोज अभियान चलाया जाए, और आवासीय–व्यावसायिक दोनों पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और संचार जैसी बुनियादी सेवाएँ तत्काल बहाल की जाएं।
करन माहरा ने कहा कि वे अगस्त में धराली गए थे और चार महीने बाद भी क्षेत्र की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। सेब उत्पादकों को मुआवजा नहीं मिला है, आजीविका खत्म हो चुकी है और लोग अत्यधिक कठिनाई में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1200 करोड़ रुपये की राहत राशि में से अब तक एक भी पैसा जारी नहीं हुआ।
कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि पार्टी तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक धराली फिर से अपने पैरों पर खड़ा न हो जाए।









