गर्भावस्था के दौरान बार-बार पैरासिटामोल लेने से नवजात में न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों का खतरा
एजेंसियां
नई दिल्ली। पैरासिटामोल दवा से लगभग हर कोई परिचित है। चाहे बुखार हो, सिरदर्द या हल्का दर्द, पहली दवा के रूप में यही याद आता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि बिना डाक्टरी सलाह के हर छोटी-छोटी समस्या में पैरासिटामोल या अन्य दर्द निवारक दवाओं का सेवन सेहत के लिए समस्याएं बढ़ाने वाला हो सकता है। इसी संबंध में हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने पैरासिटामोल के एक गंभीर दुष्प्रभाव को लेकर सावधान किया है।
जर्नल बायोमेड सेंट्रल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान अगर बिना डाक्टरी सलाह के बार-बार पैरासिटामोल दवा लेते हैं तो इससे नवजात शिशुओं में न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों को भविष्य में आटिज्म और काम पर पफोकस कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने ओवर-द-काउंटर उपलब्ध पैरासिटामोल का खुद से या बार-बार सेवन से बचने की सलाह दी है। अमेरिका स्थित इकान स्कूल आफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने कई अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर पहले के प्रकाशित करीब 46 अध्ययनों का विश्लेषण किया, जिनमें विभिन्न देशों के एक लाख से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों पर एसिटामिनोफेन के प्रभावों की जांच की गई।
इकान स्कूल आफ मेडिसिन में पर्यावरण चिकित्सा और जलवायु विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डिडियर प्राडा कहते हैं कि शोध में प्रसवपूर्व एसिटामिनोपफेन के अधिक संपर्क और बच्चों में आटिज्म-एडीएचडी के बढ़ते जोखिमों के बीच संबंध पाया गया है। आटिज्म ऐसी स्थिति है, जिससे प्रभावित बच्चों में बातचीत करने, सीखने और चीजों को समझने की क्षमता कम होती है।
वहीं एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर एक प्रकार का न्यूरोडेवलपमेंटल डिसआर्डर है। इसके कारण लोगों को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अति सक्रियता और आवेगशीलता की दिक्कत हो सकती है। विशेषज्ञ कहते है कि पैरासिटामोल या एसिटामिनोफेन दवा के व्यापक उपयोग को देखते हुए, इसके जोखिमों में थोड़ी सी भी वृद्वि से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। हमें इसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि संभावित गंभीर दुष्प्रभावों के खतरे को कम किया जा सके।
शोधकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन में पाया गया है कि पैरासिटामोल, प्लेसेंटल बैरियर को पार कर सकता है। आक्सीडेटिव स्ट्रेस को ट्रिगर करने, हार्माेन्स को बाधित करने और एपिजेनेटिक परिवर्तन पैदा कर ये भू्रण के मस्तिष्क के विकास में बाधा डाल सकता है। हाल के दशकों में दुनियाभर में आटिज्म और एडीएचडी के मामलों में वृद्वि देखी गई है। अनुमान है कि इसका खतरा आने वाले वर्षों में और भी बढ़ सकता है, इसलिए इन निष्कर्षों का सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति, नैदानिक दिशानिर्देशों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
अध्ययनकर्ताओं की टीम ने कहा कि अध्ययन यह नहीं दर्शाता है कि पैरासिटामोल सीधे तौर पर शिशुओं में तंत्रिका-विकास संबंधी विकार पैदा करता है, फिर भी प्राप्त साक्ष्य इस संबंध को पुष्ट करते हैं ये उन स्थितियों को जरूर ट्रिगर कर सकता है, जिससे बच्चों में खतरा अधिक हो सकता है।
अध्ययन के लेखकों ने गर्भवती महिलाओं को डाक्टर की सलाह पर ही पैरासिटामोल का सावधानीपूर्वक और सीमित उपयोग करने का सुझाव दिया है। डाक्टर भी इसको अधिक प्रिस्क्राइब करने से बचें। विशेषज्ञों ने कहा कि निष्कर्षों की पुष्टि के लिए और अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है, जिससे इन संबंधों को और विस्तार से समझा जा सके।








