धामी सरकार की गरीब उजाड़ो नीतियों के खिलाफ किसान महासभा की रणनीति

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हल्द्वानी 20 जुलाई ।अखिल भारतीय किसान महासभा बागजाला कमेटी की एक बैठक गांव में संपन्न हुई। बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया और तय किया गया कि पंचायत चुनाव के बाद आंदोलन तेज किया जाएगा। अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में गांव की जनता की पेयजल, सड़क, विकास कार्यों और निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाने, जल जीवन मिशन योजना को शुरू करने, मालिकाना अधिकार देने, पंचायत प्रतिनिधि चुनने के अधिकार को बहाल करने जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाओं की मांग को लेकर पिछले वर्ष नवंबर माह से संघर्षरत है लेकिन राज्य सरकार सोई हुई है इसलिए आंदोलन का विकल्प बचा है।
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डा0 कैलाश पाण्डेय ने सवाल उठाया कि कभी बागजाला, कभी राजपुरा, कभी सुभाषनगर, कभी दमुआढुंगा, कभी काठगोदाम, कभी पुछड़ी, कभी लालकुआं आखिर भाजपा सरकार गरीबों को उजाड़ने पर क्यों आमादा है? आखिर धामी सरकार चाहती क्या है? क्या यह सरकार सारी गरीब जनता को सड़क पर ले आना चाहती है? उन्होंने कहा कि धामी सरकार की गरीब उजाड़ो-बुलडोजर चलाओ नीति के खिलाफ मालिकाना अधिकार के लिए सभी गरीबों को एक मंच पर आकर संघर्ष करना वक्त की मांग है।
माले जिला सचिव ने कहा किलोगों में एकता न हो पाए इसके लिए जनता को धार्मिक विभाजन की आग में झौंका जा रहा है। यह राज्य को विनाश की तरपफ ले जाने वाला रास्ता है। इसको रोकने के लिए व्यापक जन एकता की जरूरत है, इसके लिए पूरी शिद्दत से प्रयास किया जाएगा।
किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि यह सरकार गरीब जनता को उजाड़ने की धमकी देकर डराकर रखना चाहती है। इसका जवाब जनता की एकता और आंदोलन है। किसान महासभा बागजाला सचिव वेद प्रकाश ने कहा कि बागजाला के नजदीक स्टेडियम, चिड़ियाघर बनने और बस अड्ढा, हाईकोर्ट आने की चर्चा के बाद इन बड़े प्रोजेक्ट के पास स्थित बागजाला की बेशकीमती जमीन पर बड़े पूंजीपतियों की नजरें गड़ी हुई हैं।
प्रचार सचिव पंकज चौहान ने कहा कि बागजाला की जनता अपनी संविधान सम्मत मांगो के लिए लड़ रही है। गरीबी की हालात में जिन जमीनों पर दशकों पूर्व से लोग बस चुके हैं उन जमीनों को पक्का करके लोगों को मालिकाना दिया जाए यही न्याय का तकाजा है। वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार, वन विभाग और जिला प्रशासन की बागजाला गांव के प्रति उदासीनता को देखते हुए गांव की जनता के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि राज्य में पंचायत चुनाव की समाप्ति के बाद आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष उर्मिला रैस्वाल और संचालन सचिव वेद प्रकाश ने किया। बैठक में मुख्य रूप से मीना भट्ट, दीवान सिंह बर्गली, कुंवर राम, निर्मला शाही, मधु बिष्ट, प्रकाश राज, हरुली तिवारी, सारा, चमन, सिमरन, नसरीन, नसीम, दौलत सिंह कुंजवाल, मो0 यूसुपफ, कमल जोशी, लहर अहमद, नपफीस अहमद, जाकिर अली, विशाल, अहमद, दयाकृष्ण, चन्दन राम, रमेशचन्द्र, नौशाद, समीर, पार्वती, नन्दी देवी, अनीता आदि समेत बड़ी संख्या में बागजाला गांव के ग्रामीण शामिल रहे।

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