
देहरादून 30 मई। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि उपनलकर्मियों के नियमितीकरण व अन्य लाभ प्रदान किए जाने विषयक मामले में सरकार ने इन कर्मियों को झूठी तसल्ली देकर एक तरह से झुनझुना थमा कर कर अपना अभिनंदन भी करा लिया | सरकार उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 12/11/18 का अनुपालन करने के बजाय अब विशेषज्ञ समिति बनाए जाने की बात कर रही है, जोकि एक तरह से राह में रोडा अटकाने जैसा है। अगर सरकार को इन कर्मियों के प्रति थोड़ी भी हमदर्दी होती तो सबसे पहले उच्चतम न्यायालय में योजित रिव्यू पिटिशन वापस लेने की दिशा में काम करती| सरकार इन कर्मियों के मामले में बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। इन कमेटियों के जरिए टाइम पास कर व अन्य बधाएं उत्पन्न कर धामी सरकार अपना कार्यकाल 2 पूरा करने की जुगत में है।
नेगी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में सरकार द्वारा योजित एसएलपी दिनांक 15/10/24 को खारिज होने के उपरांत सरकार द्वारा रिव्यू पिटिशन दायर गई है। सरकार को सोचना चाहिए कि इन अल्प वेतन भोगी कर्मियों के भविष्य का क्या होगा। इनके परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा।
नेगी ने कहा कि सरकार को तुरंत बगैर लाग-लपेट के उपनलकर्मियों को नियमितीकरण का लाभ व अन्य सुविधाएं प्रदान किए जाने की दिशा में रिव्यू पिटीशन वापस लेकर इनका मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। नेगी ने कहा कि उपनल कर्मियों के मामले में उच्च न्यायालय ने दिनांक 12/11/18 के द्वारा सरकार को इन कर्मियों के नियमितीकरण व अन्य लाभ प्रदान किए जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने उक्त फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी योजित की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इनको हक देना चाहिए था। सरकार चाहती है कि अगर रिव्यू पिटिशन सरकार के पक्ष में आ गई तो बहाना मिल जाएगा कि हम क्या करें। दूसरा मा. उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका पर भी लंबित है, जिस पर सरकार वेट एंड वॉच की स्थिति में है।
नेगी ने कहा कि प्रदेश के मंत्री/विधायक इतने निकम्मे हैं, जो सिर्फ अपनी सुख सुविधाओं के लिए चिंतित रहते हैं, लेकिन इन कर्मियों के लिए नही। मोर्चा उपनल कर्मियों से भी अपील करता है कि प्रदेश के नकारा एवं निकम्मे विधायकों/मंत्रियों की उदासीनता के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन करें।
मोर्चा ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि कोर्ट में अपनी फजीहत से पहले ही इन कर्मियों को इनका हक दे दो। पत्रकार वार्ता में विजय राम शर्मा व शर्मा पिन्नी मौजूद थे।








