निशा नर्सिंग होम प्रकरण: जच्चा-बच्चा की मौत पर कार्रवाई न होने से पीड़ितों में रोष, आंदोलन की चेतावनी

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देहरादून 25 जून। निशा नर्सिंग होम में कथित चिकित्सीय लापरवाही के चलते जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में पीड़ित पक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और जांच समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में लापरवाही साबित होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने बताया कि सीएमओ द्वारा गठित जांच समिति ने 23 जून को अपनी रिपोर्ट में निशा नर्सिंग होम की लापरवाही को स्वीकार करते हुए संस्थान का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की थी। इसके बावजूद नर्सिंग होम से जुड़े डॉक्टरों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ अभी तक कोई वैधानिक अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि कार्रवाई में हो रही देरी न्याय प्रक्रिया को कमजोर कर रही है और इससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मृतका और नवजात के परिजनों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार ने देहरादून के सीएमओ तथा जांच समिति से मांग की है कि एक सप्ताह के भीतर संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन शुरू करेंगे और दोषियों को सजा दिलाने तक संघर्ष जारी रखेंगे।

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