बेरोजगारी-गरीबी और महंगाई को नज़रअंदाज करने का आरोप ।।
देहरादून 1 फरवरी ।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष *सूर्यकांत धस्माना* ने केंद्रीय बजट 2025-26 को *गरीब, बेरोजगार और ग्रामीण भारत के खिलाफ* करार देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आज केंद्रीय बजट पर पत्रकारों से अपने कैंप कार्यालय में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि *यह बजट केवल प्रचार तक सीमित है*, लेकिन जमीनी स्तर पर बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान में विफल रहेगा।
*बेरोजगारी पर कोई ठोस नीति नहीं*
धस्माना ने कहा कि बजट में *नौकरी के नए अवसर पैदा करने पर कोई ठोस योजना नहीं दी गई*। सरकार ने स्टार्टअप और निजी निवेश को बढ़ावा देने की बात तो की, लेकिन *युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों या उद्योगों में रोजगार बढ़ाने का कोई सीधा प्रावधान नहीं रखा*।
*महंगाई रोकने के लिए कोई कदम नहीं*
बढ़ती *खाद्य वस्तुओं, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों** पर कोई नियंत्रण नहीं किया गया। गरीब और मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि सरकार *राशन, गैस, और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर राहत देगी*, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
*ग्रामीण भारत की उपेक्षा*
उन्होंने कहा कि यह बजट **ग्रामीण भारत और किसानों के खिलाफ** है। *एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कोई घोषणा नहीं की गई*, न ही किसानों के कर्ज माफी पर चर्चा हुई। गांवों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ, जिससे साफ है कि *बजट का फोकस केवल शहरी क्षेत्रों पर है*।
*शिक्षा और स्वास्थ्य की अनदेखी*
सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा में सुधार के लिए *कोई नई योजना नहीं लाई गई*, जिससे युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। वहीं, *स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कोई बड़ी पहल नहीं की गई*, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।
*केवल प्रचार का बजट?*
धस्माना ने आरोप लगाया कि *सरकार इस बजट को वेतनभोगी वर्ग के हित में बताकर प्रचार कर रही है*, लेकिन असल में *गरीबों, किसानों और बेरोजगारों की अनदेखी की गई है*। उन्होंने कहा, “यह बजट सिर्फ प्रचार के लिए अच्छा है, लेकिन धरातल पर असफल साबित होगा।”









