सीमांत गांवों और भारत-चीन सीमा से रूबरू हुए युवा

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उत्तरकाशी, 22 जून। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) द्वारा आयोजित सात दिवसीय ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का उत्तरकाशी में भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम के तहत अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश से आए युवाओं ने उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्रों, भारत-चीन सीमा और वाइब्रेंट विलेजेस का भ्रमण कर वहां के विकास कार्यों, संस्कृति और सीमाई जीवन की चुनौतियों को करीब से जाना।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को आईटीबीपी की 12वीं वाहिनी के माटली कैंप में सीमा सुरक्षा और वाइब्रेंट विलेज योजना की रणनीतिक महत्ता की जानकारी दी गई। युवाओं ने अपनी शारीरिक एवं मानसिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कंदारा बुग्याल के दुर्गम ट्रैक को भी सफलतापूर्वक पूरा किया।

सुखी गांव में प्रतिभागियों ने ग्राम प्रधानों और स्थानीय लोगों से संवाद कर ग्राम सर्वेक्षण के माध्यम से क्षेत्र की समस्याओं और स्वरोजगार की संभावनाओं का अध्ययन किया। वहीं शाम को स्थानीय संस्कृति पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

झाला गांव में युवाओं ने ग्राम प्रधान के साथ संवाद किया तथा खेलकूद प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इस दौरान “सरकारी योजनाएं और राजनीति में युवाओं की भागीदारी” विषय पर विशेष चर्चा भी आयोजित की गई।

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण भारत-चीन सीमा पर स्थित नेलोंग और जादुंग जैसे ऐतिहासिक एवं रणनीतिक गांवों का दौरा रहा। युवाओं ने आईटीबीपी की नागा बॉर्डर आउटपोस्ट पहुंचकर देश की रक्षा में तैनात हिमवीरों के साथ भोजन किया और उनका उत्साहवर्धन किया। इसके बाद आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट के साथ संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था और विषम परिस्थितियों में सैन्य प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की। युवाओं ने विश्वप्रसिद्ध गंगोत्री धाम और गांव का भी भ्रमण किया।

सातवें और अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सीमांत क्षेत्रों के अध्ययन और अनुशासित सहभागिता के लिए प्रतिभागी युवाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इसका उद्देश्य देश के युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की समृद्ध संस्कृति, भौगोलिक चुनौतियों तथा प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज विजन’ से सीधे परिचित कराना था। उनका कहना था कि विभिन्न राज्यों के युवाओं द्वारा प्राप्त यह अनुभव विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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