
देहरादून, 09 अप्रैल ।आगामी 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए परिवहन विभाग की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। यात्रा के प्रभावी यातायात प्रबंधन के लिए 16 अप्रैल से विभिन्न प्रमुख स्थानों पर हाईटेक चेक पोस्ट संचालित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और जिलाधिकारी के निर्देश पर आशारोड़ी, कटा पत्थर, कोठाल गेट, हर्बर्टपुर, ऋषिकेश, सत्यनारायण, तपोवन, भद्रकाली और सोनप्रयाग में स्थापित किए जा रहे चेक पोस्टों को वाई-फाई सुविधा से लैस किया गया है। इन चेक पोस्टों पर ग्रीन कार्ड, ट्रिप कार्ड और वाहनों की सघन जांच की जाएगी ताकि यात्रा के दौरान व्यवस्था सुचारु बनी रहे।यात्रा की निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर प्रवर्तन टीमें भी तैनात की जाएंगी। ये टीमें वाहनों की तकनीकी फिटनेस, आवश्यक दस्तावेज और अन्य मानकों की जांच करेंगी। वहीं, ऋषिकेश में एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है, जहां से यात्रा से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। श्रद्धालु टोल फ्री नंबर 0135-2743432 पर संपर्क कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे।
संभागीय परिवहन अधिकारी संदीप सैनी के अनुसार, विभाग की सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और 16 अप्रैल से सभी चेक पोस्ट पूरी तरह सक्रिय हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि 30 मार्च से शुरू हुई ग्रीन कार्ड बनाने की प्रक्रिया के तहत अब तक 1500 से अधिक ग्रीन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। हरिद्वार के अलावा रुड़की और आशारोड़ी में भी ग्रीन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
चारधाम यात्रा के दौरान जाम की समस्या से निपटने के लिए हरबर्टपुर बस अड्डा और ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप पर स्थापित चेक पोस्टों पर बसों की पूर्व जांच की जाएगी, जिससे कटा पत्थर, भद्रकाली और तपोवन क्षेत्रों में यातायात सुचारु बना रहे। इसके साथ ही लंबी दूरी तय कर आने वाले वाहन चालकों की सुविधा के लिए आशारोड़ी और नारसन बॉर्डर पर रेस्ट पॉइंट भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां बेड और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए प्रदेश के बॉर्डर क्षेत्रों में अत्याधुनिक एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे भी सक्रिय कर दिए गए हैं। भद्रकाली, तपोवन, कटा पत्थर और नारसन बॉर्डर जैसे प्रमुख स्थानों पर इन कैमरों के माध्यम से गुजरने वाले वाहनों की निगरानी सीधे मुख्यालय स्तर से की जाएगी। इससे यात्रा के दौरान सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।







