
नई दिल्ली, 09 अप्रैल । यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए रेल मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। रेल मंत्री की अध्यक्षता में रेल भवन में हुई समीक्षा बैठक में रेलवे ट्रैक और पुलों पर उपयोग होने वाले स्लीपरों को आधुनिक कॉम्पोजिट स्लीपरों से बदलने का फैसला लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि ब्रिज एप्रोच, पॉइंट्स और क्रॉसिंग में अब कॉम्पोजिट स्लीपर लगाए जाएंगे। ये स्लीपर मौजूदा लोहे और कंक्रीट के भारी स्लीपरों की तुलना में हल्के होने के साथ अधिक भार वहन करने में सक्षम हैं। इनकी कुशनिंग बेहतर होने के कारण ट्रेन के गुजरने के दौरान झटके कम महसूस होंगे और यात्रियों का सफर अधिक आरामदायक होगा।कॉम्पोजिट स्लीपरों की खासियत यह है कि इन्हें स्थान की विशेष परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन कर लगाया जा सकता है। ये प्रति वर्ग सेंटीमीटर लगभग 700 किलोग्राम तक का भार सहन करने में सक्षम हैं और इनकी आयु भी अधिक होती है। इनके उपयोग से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी।
इसके साथ ही रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। निरीक्षण गाड़ियों में एआई आधारित विशेष डिवाइस लगाई जाएगी, जिसमें ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार तकनीक के माध्यम से ट्रैक के नीचे की स्थिति का भी विश्लेषण किया जा सकेगा।रेल पटरियों की वेल्डिंग गुणवत्ता सुधारने के लिए ‘मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग’ तकनीक अपनाने का भी निर्णय लिया गया है। इस तकनीक से वेल्डिंग में मौजूद सूक्ष्म दोषों का आसानी से पता लगाया जा सकेगा।रेल मंत्रालय के अनुसार, ये सभी निर्णय भारतीय रेल द्वारा यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।







