
नई दिल्ली 09 अप्रैल। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा है कि देश के अंतिम गांव के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समय पर पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य एवं कल्याण इकोसिस्टम को मजबूत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में होम्योपैथी एक प्रभावी और किफायती चिकित्सा पद्धति के रूप में उभर रही है, जो ग्रामीण, जनजातीय और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विश्व होम्योपैथी दिवस पर उन्होंने कहा कि भारत में होम्योपैथी न केवल व्यक्तिगत उपचार बल्कि समग्र और सतत स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने में भी योगदान दे रही है। इस वर्ष विश्व होम्योपैथी दिवस की थीम “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” रखी गई है।
उन्होंने बताया कि 18वीं शताब्दी में सैमुअल हैनिमैन द्वारा विकसित होम्योपैथी “सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंचर” यानी “समान से समान का उपचार” के सिद्धांत पर आधारित है। भारत में यह प्रणाली लंबे समय से समग्र और रोगी-केंद्रित उपचार पद्धति के रूप में स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
जाधव ने कहा कि देश में 290 से अधिक होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हैं और चिकित्सकों का बड़ा नेटवर्क उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी का वास्तविक प्रभाव दूरदराज के इलाकों में दिखाई देता है, जहां एक अकेला चिकित्सक भी सामुदायिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत देशभर में 12,500 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) स्थापित किए गए हैं, जहां होम्योपैथी सहित विभिन्न आयुष पद्धतियों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
जाधव ने कहा कि होम्योपैथी मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गैर-संक्रामक बीमारियों के प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध हो रही है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों में इसे शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि होम्योपैथी की दवाइयां किफायती होती हैं, इन्हें संग्रहित करना आसान होता है और इनका पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि यह प्रणाली सतत और समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण में सहायक बन रही है।
जाधव ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं से परे हर नागरिक तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी अपने सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।







