
देहरादून, 16 मार्च। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के परिसर संस्थान महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, देहरादून के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में “फ्यूचर कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी” विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन “शैशिक ऊर्जा” (उप-विषय: स्वच्छ ऊर्जा, हरित पर्यावरण, सुरक्षित भविष्य) के पोस्टर का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के प्रो. देबाशीष घोष, आईआईटी रोपड़ के प्रो. अश्विनी शर्मा, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज कुमार पांडा, डीन अकादमिक एवं रिसर्च डॉ. आशीष बगवाड़ी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के विभागाध्यक्ष के.सी. मिश्रा भी मौजूद रहे।
डॉ. आशीष बगवाड़ी ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इस फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का उद्देश्य मोबाइल और ऑप्टिकल फाइबर संचार, उच्च गति डेटा नेटवर्क, वायरलेस एवं स्मार्ट संचार प्रणालियों तथा एआई-सक्षम नेटवर्क में उन्नत अवधारणाओं और नवीनतम शोध प्रवृत्तियों से शिक्षकों और छात्रों को अवगत कराना है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज कुमार पांडा ने कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर को स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। वहीं कार्यक्रम संयोजक डॉ. आशीष बगवाड़ी ने आमंत्रित वक्ताओं प्रो. देबाशीष घोष और प्रो. अश्विनी शर्मा को भी स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाकर ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए अतिथि वक्ताओं को भविष्य में संस्थान के साथ शोध एवं अकादमिक सहयोग के लिए आमंत्रित किया।
कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. देबाशीष घोष ने “संपीड़ित संवेदन और वायरलेस संचार में इसका अनुप्रयोग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक शैनन-नाइक्विस्ट सैंपलिंग पद्धति की तुलना में संपीड़ित संवेदन तकनीक के माध्यम से संकेतों को कम डेटा बिंदुओं के साथ सैंपल और पुनर्निर्मित किया जा सकता है, जिससे संसाधनों और समय की बचत होती है। उन्होंने विरलता (स्पार्सिटी) की अवधारणा और अनुकूलन एल्गोरिदम के माध्यम से संकेतों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी।
दूसरे सत्र में आईआईटी रोपड़ के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अश्विनी शर्मा ने रेक्टेना डिवाइस और माइक्रोवेव सिस्टम के अनुप्रयोगों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भविष्य में संचार तकनीक में इनके संभावित उपयोग और शोध के अवसरों पर प्रकाश डाला तथा प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
उद्घाटन सत्र के अंत में कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने 2 और 3 जून 2026 को आईआईटी गांधीनगर, गुजरात में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन “शैशिक ऊर्जा” (उप-विषय: स्वच्छ ऊर्जा, हरित पर्यावरण, सुरक्षित भविष्य) के पोस्टर का विमोचन किया। यह सम्मेलन “विभा” विज्ञान भारती, नीड मिशन, सेंटर बोर्ड ऑफ इरीगेशन एंड पावर, नई दिल्ली तथा आईआईटी गांधीनगर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।
यह पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम 20 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के विभिन्न संस्थानों से आए प्रख्यात वैज्ञानिक और प्रोफेसर प्रतिभागियों को फ्यूचर कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी से जुड़े नवीनतम शोध और तकनीकी पहलुओं की जानकारी देंगे।







