डीबीएस कॉलेज के एनएसएस शिविर में यूथ रेडक्रॉस ने दिया आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण

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देहरादून, 15 मार्च 2026।
बाल भवन, रायपुर रोड में चल रहे डीबीएस (पीजी) कॉलेज के सात दिवसीय एनएसएस शिविर में विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत यूथ रेडक्रॉस कमेटी के चीफ मास्टर ट्रेनर डॉ. अनिल वर्मा ने आपदा प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण दिया। इस दौरान छात्र-छात्राओं को आपदा की स्थिति में बचाव कार्य और प्राथमिक उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

प्रशिक्षण सत्र में डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील राज्य है। यहां भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, त्वरित बाढ़ और जंगलों में आग लगने जैसी आपदाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। उन्होंने बताया कि टेक्टोनिक प्लेटों के कारण क्षेत्र में भारी ऊर्जा संचित है, जिससे भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना बनी रहती है। ऐसे में आपदाओं को रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन पूर्व तैयारी, रेस्क्यू प्रशिक्षण और प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी से जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवा आपदा के समय लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रशिक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं को सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत विभिन्न बचाव तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें फ्री हैंड और रोप रेस्क्यू तकनीकों के माध्यम से क्षतिग्रस्त भवनों में फंसे घायलों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने के तरीके सिखाए गए। साथ ही टू-थ्री-फोर हैंडेड सीट, फायरमैन लिफ्ट, टो-ड्रैग और अन्य रेस्क्यू तकनीकों का अभ्यास कराया गया।

प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण में हार्ट अटैक की स्थिति में सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की विधि, रक्तस्राव रोकने, हड्डी टूटने, घाव और आग से जलने की स्थिति में उपचार के तरीके बताए गए। इसके अलावा डेंगू और टीबी जैसी बीमारियों से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई।

एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बिद्युत बोस के निर्देशन में टीम लीडर अथर्व थपलियाल, तेजपाल सिंह रावत, आकाश रावत, राहुल बिष्ट, श्रीयांश बडोला, राहुल बडोनी, सूरज वर्मा, वैभव भारद्वाज और सिद्धार्थ नेगी सहित अन्य छात्रों ने रेस्क्यू तकनीकों और सीपीआर का सफल प्रदर्शन किया।

अग्निशमन प्रशिक्षण के अंतर्गत आग के प्रकार, आग बुझाने के सिद्धांत और अग्निशमन उपकरणों के उपयोग की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में रक्तदाता शिरोमणि अवार्ड से सम्मानित डॉ. अनिल वर्मा ने रक्तदान, नेत्रदान और देहदान के महत्व पर प्रेरक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि अब तक वे स्वयं 155 बार रक्तदान कर चुके हैं।

डॉ. वर्मा ने थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी से बचाव के लिए विवाह से पहले लड़का-लड़की दोनों की थैलेसीमिया जांच कराने की सलाह दी। इसके साथ ही डेंगू, टीबी, एड्स से बचाव, सड़क सुरक्षा और नशा मुक्ति के विषय में भी छात्रों को जागरूक किया गया।

प्रशिक्षण शिविर के अंत में छात्र-छात्राओं ने नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज सेवा के लिए आगे आने का संकल्प लिया। साथ ही डॉ. अनिल वर्मा के नेतृत्व में रक्तदान, नेत्रदान और देहदान करने की शपथ भी ली।

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