पीआरडी जवानों ने नियमितीकरण व सम्मानजनक वेतन की मांग उठाई

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देहरादून। प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों और कार्मिकों ने अपने नियमितीकरण, सम्मानजनक वेतन और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर शीघ्र ठोस निर्णय लेने की अपील की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि संगठन की स्थापना 11 दिसंबर 1948 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रांतीय रक्षक दल अधिनियम, 1948 के अंतर्गत की गई थी। इसका उद्देश्य प्रदेश में सामुदायिक सद्भाव और शांति व्यवस्था बनाए रखना तथा नागरिकों को अनुशासित और संगठित बनाना था। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी पीआरडी के जवान कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और विभिन्न राजकीय व सामाजिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जवानों का कहना है कि सीमित संसाधनों और अल्प मानदेय में वे कठिन एवं जोखिमपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी रोजगार का दर्जा प्राप्त नहीं है। पुलिस और होमगार्ड की तरह कार्य करने के बावजूद उन्हें समान वेतन, भत्ते और सेवा सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है। चिकित्सा सुविधा, पेंशन, बीमा, पदोन्नति और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जवानों और उनके परिवारों को असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
पीआरडी संगठन ने चरणबद्ध नियमितीकरण, स्थायी सेवा नियमावली के निर्माण, सम्मानजनक वेतनमान लागू करने और संगठन को सशक्त एवं स्थायी बल के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक शासनादेश शीघ्र जारी करने की मांग की है।
जवानों ने कहा कि वे समय-समय पर शासन और प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराते रहे हैं, लेकिन अब तक उनके सुरक्षित भविष्य और नियमितीकरण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

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