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देहरादून, 4 जनवरी 2026।
श्री सिद्वेश्वर महादेव मंदिर, केदारपुर के स्वर्ण जयंती (50वें प्राकट्य दिवस) के अवसर पर आयोजित भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक समारोह में मंदिर परिसर में कराए गए नवनिर्माण कार्यों का विधिवत लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मंदिर निर्माण एवं विकास में योगदान देने वाले महानुभावों को सम्मानित भी किया गया।
समारोह में श्री सिद्वेश्वर महादेव समिति, पशुपति आश्रम के संरक्षक कुशलपाल सिंह चंदेल, ब्रिगेडियर पी.एस. गुरूंग, मंदिर की भूमि दान देने वाले स्व. राम लाल के पौत्र सुरेश यादव, रमेश यादव एवं नरेश यादव, ले.ज. (सेनि.) राम प्रधान, ले. कर्नल (सेनि.) जीवन क्षेत्री, कर्नल एस.एस. कंवर, मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष कर्नल संदीप क्षेत्री, डॉ. अजय शर्मा (न्यू रोड), संस्थापक सदस्य एडवोकेट प्रेम प्रकाश भूषाल, एडवोकेट एन.एस. बिष्ट की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि श्रीमहंत कृष्णा गिरी जी महाराज, विशिष्ट अतिथि धर्मपुर विधायक विनोद चमोली तथा सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने नवनिर्माण कार्यों का लोकार्पण किया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार महन्त आन्नदगिरी महाराज,मंदिर आचार्य रामानंद शास्त्री, समिति अध्यक्ष एस.बी. थापा एवं समिति सदस्यों ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके पश्चात प्रातःकालीन पूजन, रुद्राभिषेक, यज्ञ एवं पूर्णाहुति संपन्न हुई। आचार्य रामानंद शास्त्री ने कहा कि श्री सिद्वेश्वर महादेव मंदिर एक जाग्रत और मनोकामना सिद्ध करने वाला पवित्र स्थल है। समिति अध्यक्ष एस.बी. थापा ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक सहयोग से यह विशाल कार्य संभव हो सका है।
यह मंदिर दो पूर्व सैनिकों लक्ष्मण सिंह (भगत जी, एएससी) एवं करण बहादुर आले (5/8 जीआर) की गहरी आस्था का प्रतीक है। मान्यता के अनुसार खेती के दौरान काले सांपों के दर्शन और 26 दिसंबर 1975 को भगत जी को स्वप्न में जामुन के पेड़ के नीचे गौरी-शंकर शिवलिंग मिलने की प्रेरणा प्राप्त हुई। 4 जनवरी 1976 को जुड़वा शिवलिंग प्राप्त कर बाम्बी गुफा में स्थापित किया गया।
बाद में नेपाल के जुम्ला महामू पर्वत से प्राप्त झंडा, चांदी प्रतिमा और विशिष्ट शिवलिंग को विधिवत प्रतिष्ठित किया गया। यह मंदिर जुड़वा शिवलिंग वाला एकमात्र मंदिर माना जाता है। 28 जून 1982 को अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर मंदिर का नाम श्री सिद्वेश्वर महादेव रखा गया, जबकि 14 अप्रैल 1989 को विश्व शांति यज्ञ का आयोजन भी किया गया।
स्वर्ण जयंती के अवसर पर मंदिर के संरक्षक, संस्थापक सदस्य, साधु-संत, अतिथि, निर्माण कार्यों में सहयोग देने वाले महानुभावों एवं वरिष्ठजनों को शाल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान भंडारे का आयोजन भी हुआ। संपूर्ण व्यवस्थाओं में विनोद भद्री (भद्री गेस्ट हाउस) का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष रजनीश काम्बोज, सचिव किशन थापा, सहसचिव अमर थापा, कोषाध्यक्ष अशोक थापा, व्यवस्थापक मोहित काम्बोज, लेखा परीक्षक संजय कटियार, प्रचार मंत्री संध्या एवं देवेंद्र थापा, सदस्य अशोक घले, प्रेम घर्ती, दीपक सती, पंडित दुर्गा प्रसाद पौडेल, अरूणा पुन, कमला थापा, बिजेश्वरी कुंवर, मंजू थापा, पुजारी पंडित संजय खंकरियाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे।






