स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति ला रहा उत्तराखंड — मातृ मृत्यु दर में 77% की कमी, 34 लाख लोगों को मिला आयुष्मान आरोग्य केंद्रों से लाभ

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मुख्यमंत्री धामी बोले — स्वस्थ उत्तराखंड ही समृद्ध उत्तराखंड की नींव

देहरादून, 6 नवंबर।
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर उत्तराखंड अब स्वास्थ्य क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कहीं अधिक मजबूत और सुलभ बनी हैं। मातृ मृत्यु दर में 77 फीसदी कमी आई है, जबकि राज्यभर में संचालित 1985 आयुष्मान आरोग्य केंद्रों से अब तक 34 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि “राज्य का हर नागरिक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ सके।” उन्होंने कहा कि “स्वस्थ उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड” के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को अंतिम छोर तक पहुँचाया है।

स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार — गांव-गांव तक पहुंचा इलाज

राज्य में अब तक 13 जिला चिकित्सालय, 21 उपजिला चिकित्सालय, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 577 पीएचसी और करीब 2000 मातृ-शिशु कल्याण केंद्र कार्यरत हैं। सरकार ने हाल ही में छह उपजिला चिकित्सालय, छह सीएचसी और नौ पीएचसी के उन्नयन को मंजूरी दी है।
सेलाकुई (देहरादून) और गेठिया (नैनीताल) में 100-100 शैय्यायुक्त मानसिक चिकित्सालय तेजी से बन रहे हैं। एम्स ऋषिकेश के सहयोग से शुरू की गई हेली-एम्बुलेंस सेवा पर्वतीय इलाकों में जीवन रक्षक सिद्ध हो रही है।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट

राज्य गठन के समय मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 450 प्रति लाख थी, जो अब घटकर 91 रह गई है। वहीं शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 52 से घटकर 20 पर आ गई है।
सकल प्रजनन दर भी 3.3 से घटकर 1.7 हो गई है। संस्थागत प्रसव दर 21% से बढ़कर अब 83% हो चुकी है।

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी

स्वास्थ्य विभाग में अब 2885 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 2598 चिकित्सक तैनात हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है।
नर्सिंग सेवाओं को सशक्त करने के लिए 1399 नर्सिंग अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। एएनएम के 1933 पद बढ़ाकर 2295 किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश भरे जा चुके हैं।

जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं, टीबी उन्मूलन में सफलता

प्रदेश में 335 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हैं, जहां दवाएं बाजार भाव से 50 से 80 फीसदी सस्ती मिल रही हैं।
टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत 2182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं। 18,000 से अधिक निक्षय मित्र इस अभियान से जुड़े हैं।

108 एम्बुलेंस सेवा बनी जीवन रक्षक

वर्ष 2008 में शुरू हुई 108 आपातकालीन सेवा अब राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बन गई है। वर्तमान में 272 एम्बुलेंस (217 बेसिक, 54 एडवांस, 1 बोट) कार्यरत हैं।
साल 2019 से अगस्त 2025 तक इस सेवा ने 8.79 लाख लोगों की जान बचाई है।

तीर्थयात्रियों के लिए विशेष स्वास्थ्य व्यवस्था

चारधाम और कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान धामों और मार्गों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और उपकरणों की तैनाती की जाती है। यात्रियों की सुविधा के लिए 13 भाषाओं में स्वास्थ्य परामर्श जारी किए जाते हैं।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा

“मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार आया है। एनएचएम, आयुष्मान भारत, टेलीमेडिसिन, 108 सेवा और जन औषधि केंद्र जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती दी है। हमारा लक्ष्य है कि हर गांव, हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा समय पर पहुंचे।”

मुख्यमंत्री धामी ने कहा —
“हमने स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मातृ और शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी आई है, संस्थागत प्रसव दर बढ़ी है और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति नई चेतना आई है। हमारा लक्ष्य है — स्वस्थ उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड।”

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