पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को मिलेगा पद्मभूषण

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देहरादून, 24 मई ।उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 25 मई को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जाएगा।

भगत सिंह कोश्यारी, जिन्हें उत्तराखंड में स्नेहपूर्वक ‘भगत दा’ के नाम से जाना जाता है, एक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, पत्रकार और राष्ट्रवादी नेता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान तथा राष्ट्र सेवा को समर्पित किया है।
17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के सुदूर गांव पलानधुरा में जन्मे कोश्यारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त की और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत व्याख्याता के रूप में की, लेकिन जल्द ही शिक्षा और समाज सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया।
वर्ष 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कर उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार की मजबूत नींव रखी। इसके अलावा विवेकानंद इंटर कॉलेज सहित कई शैक्षिक संस्थानों के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
राजनीतिक जीवन में भी कोश्यारी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वे पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 2008 में वे राज्यसभा और 2014 में नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए।ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने टिहरी हाइड्रो परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही संसद की याचिका समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने वन रैंक वन पेंशन, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और आधारभूत ढांचे के विकास जैसे मुद्दों पर अहम सिफारिशें दीं।
5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने सक्रिय प्रशासनिक भूमिका निभाई। अगस्त 2020 में उन्हें गोवा का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।कोश्यारी एक लेखक भी हैं और उन्होंने “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” तथा “उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान” जैसी पुस्तकों के माध्यम से राज्य के विकास की अपनी दृष्टि को प्रस्तुत किया है।उनका जीवन समर्पण, सादगी और राष्ट्र सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है। पद्मभूषण से सम्मानित किया जाना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता माना जा रहा है।

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