
देहरादून 24 जून ।नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही हैं। तीन जून को नैनीताल हाईकोर्ट से निर्णय पारित होने के बावजूद धोखाधड़ी के मामले में पुलिस अभी तक हरकत में नहीं आई है।
ताजा उदाहरण पुरकुल में मसूरी रोड स्थित करोड़ों की भूमि विक्रय से जुड़ा है। उत्तराखंड के युवा उद्यमी के शोषण का यह अनूठा मामला है।युवा उद्यमी बिक्रम राणा द्वारा राजपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन और सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर हताश होकर सीएम और पीएम पोर्टल पर न्याय के लिए आत्मघात तक की अपील करनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि बिक्रम राणा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व गढ़वाल सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत के सगे भांजे और युवा उद्यमी हैं।
हैरानी की बात यह है कि नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्णय के बावजूद पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने की बजाय टालमटोल कर रही है।
मामले के अनुसार राजकुमार यादव एवं अन्य के विरुद्ध देहरादून के राजपुर थाने में 14 सितम्बर 2025 को आईपीसी की धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471 के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई थी। मसूरी रोड स्थित पुरकुल गांव में जमीन की खरीद फरोख्त के इस मामले में राजकुमार यादव, हरीश यादव, राजीव वाड्रा, संजय सिंह, श्रीमती मेधा भारद्वाज, बिज्जू, विनोद कुमार और नीरजा सिंह प्रतिवादी बनाए गए थे। इन पर आरोप है कि 19 करोड़ 81 लाख अपने खाते में जमा कराने के बाद ये सभी बिक्रम राणा के पक्ष में जमीन का बैनामा नहीं करा रहे हैं।
प्रतिवादियों ने साई इंफ्रा प्रोडक्ट्स प्रा0लि0 की पुरकुल स्थित भूमि का विक्रय का सौदा बिक्रम राणा के साथ किया। प्रतिवादियों ने बिक्रम राणा से 19.81 करोड़ रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवाए और इसके बाद उनकी नीयत में खोट आ गया। घोखाधड़ी का यह मामला सुप्रीम कोर्ट और नैनीताल हाईकोर्ट में सुना जा चुका है।
राजपुर थाना देहरादून में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रतिवादियों ने अग्रिम जमानत ले ली, और प्राथमिकी निरस्त करवाने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में रिट अपील दायर की।
नैनीताल हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई और तथ्यों की पड़ताल के बाद अपील खारिज कर दी। तब पुलिस को तुरंत हरकत में आ जाना चाहिए था लेकिन पुलिस खामोशी से सब कुछ कोर्ट के बाहर सुलटाने की जुगत में दिखती है।
नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय को पूरा एक पखवाड़ा बीत चुका है किंतु पुलिस के कानों पर अभी जूं तक नहीं रेंगी है और सब कुछ ऊपर से दबाव के आदेश में सिमटा हुआ नज़र आता है।
दूसरी ओर लोकमानस के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि राज्य के बाहर के लोगों के साथ पैसों के खेल में हर तरह की रियायत बरती जा रही है, लेकिन अपने प्रदेश के बुबा लोगों के साथ हमदर्दी का उदाहरण अथवा न्याय होता नहीं दिख रहा है। इसके विपरीत दूसरे प्रदेशों से आकर अपराधी प्रवृत्ति के लोग उत्तराखंड में धड़ल्ले से गोरखधंधे कर रहे हैं, वे यहां के मूल निवासियों और युवाओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी और छल कर रहे हैं, किंतु नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय के बावजूद पुलिस अपनी दर्ज प्राथमिकी पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा पायी है सो प्रशासन की इस चुप्पी पर आश्चर्य होना स्वाभाविक है।








