
देहरादून, 12 जून। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने शुक्रवार को देहरादून स्थित अपने क्षेत्रीय कार्यालय में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली क्षेत्रीय सलाहकार समिति (आरएसी) बैठक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय आजीविका के लिए कौशल अंतराल को कम करने संबंधी कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का विषय “ग्रामीण उत्तराखंड में स्थानीय आजीविका के लिए कौशल अंतराल को घटाना: उद्यम प्रोत्साहन और पलायन में कमी हेतु जिला-स्तरीय रणनीतियाँ” रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में डीडीयू-जीकेवाई के मुख्य संचालन अधिकारी डॉ. प्रभाकर सी. बेबनी की विशेष सहभागिता रही। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास, रोजगार सृजन और पलायन रोकने के लिए जिला-स्तरीय रणनीतियों पर विस्तार से विचार साझा किए।
डॉ. बेबनी ने उत्तराखंड में नाबार्ड की ओर से संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण, सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम, आजीविका उद्यम विकास कार्यक्रम तथा विपणन से जुड़े प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों से ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्यमिता को बढ़ावा देने, पलायन कम करने, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लाभार्थियों को एकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने तथा सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विभागीय अभिसरण को मजबूत किया जाना चाहिए।
बैठक में कृषि, उद्यान, ग्रामीण विकास, बैंकिंग तथा खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और कौशल की कमी को दूर करने के लिए संयुक्त प्रयासों की रूपरेखा पर मंथन किया गया।
नाबार्ड ने इस अवसर पर ग्रामीण समुदायों और युवाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण एवं रोजगार संवर्धन के माध्यम से सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैंक ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से ग्रामीण युवाओं को स्थायी रोजगार मिलेगा, पलायन में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि तथा सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।







