
हरिद्वार, 24 मई ।पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा निर्मित नव-निर्मित धर्मशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होते हुए उन्होंने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना की और इसे सेवा, समर्पण तथा परोपकार का जीवंत उदाहरण बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षत्रिय कलौता समाज ने अपने परिश्रम, साहस और संस्कारों के बल पर समाज और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इस समाज के लोगों ने खेती, व्यापार, शिक्षा, समाजसेवा और देश की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और अन्य सुरक्षा बलों में सेवाएं देकर वीर सपूत देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा धार्मिक जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और मानव सेवा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
हरिद्वार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शहर भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का प्रवेश द्वार है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मां गंगा के सानिध्य में आस्था और ऊर्जा का अनुभव करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला का निर्माण एक पुण्य कार्य है, जो आगामी कुंभ और चारधाम यात्रा में लाखों लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार कुंभ को भव्य, दिव्य और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कार्य कर रही है। घाटों के पुनरुद्धार, सड़क, स्वच्छता, यातायात और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए तेजी से काम जारी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम पुनर्विकास, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी केदारखंड और मानसखंड क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास का कार्य जारी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है, जो विशेष रूप से मातृशक्ति के सम्मान से जुड़ा है।उन्होंने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने और सामाजिक सौहार्द कायम रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। साथ ही निर्देश दिए कि धार्मिक आयोजन निर्धारित स्थलों पर ही आयोजित किए जाएं, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक संत, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आनंद धर्मशाला आने वाले समय में श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के लिए सेवा और सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।







